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संस्थान अध्यक्ष एवं मंत्री की कलम से ... 

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रवि कुमार 

अध्यक्ष 

आदरणीय गीता दीदी ने 73 साल पहले समाज के वंचित परिवारों के बच्चों को पढ़ाने का काम शुरू किया था. उन्हें यह प्रेरणा बापू महात्मा गांधी द्वारा उन्ह लिखे गए एक पत्र से मिली थी, जिसमें उन्होंने उन्हें बहुत कम उम्र में अपने पति को खोने के दर्द से उबरने के लिए समाज सेवा करने में लग जाने की सलाह दी थी.  गीता जी ने यह यात्रा एक मिशन के साथ शुरूकी – समाज के उत्थान के लिए यह बहुत ज़रूरी है कि बच्चों और महिलाओं को अच्छी शिक्षा मिले, खासकर उन परिवारों के बच्चों को जिनके पास इसके लिए संसाधन नहीं हैं.  उनका उद्देश्य बालक- बालिकाओं में आत्मनिर्भरता, सादगी, देशभक्ति और समाज सेवा के गुण विकसित करना था, ताकि देश को अच्छे नागरिकों की एक पीढ़ी मिले, जिसके लिए उन्होंने अपना पूरा जीवन समर्पित कर दिया.  गीता दीदी हमेशा गांधी जी के इस सिद्धांत का पालन करती रहीं कि अपने काम के प्रति पूरी तरह समर्पित रहो, लेकिन दूसरों को कोई परेशानी न हो.

गीता दीदी ने इस संस्थान को ईंट-ईंट करके बनाया, और धीरे-धीरे समाज के गरीब तबके के छोटे-छोटे बच्चों के एक छोटे से समूह से शुरुआत की.  जब बाल मंदिर हैप्पी स्कूल (जैसा कि उन्होंने शुरू में इसका नाम रखा था) लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल बन गया, तो उन्होंने एक कदम और आगे बढ़ाया और 70 के दशक की शुरुआत में महिलाओं के लिए STC कॉलेज शुरू किया, और फिर 1976 में इसमें महिलाओं के लिए एक B.Ed. कॉलेज भी शामिल किया.  वह हमेशा महिलाओं की शिक्षा के विकास में अपना योगदान देना चाहती थीं, जो देश में महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए बहुत ज़रूरी है.

मुझे गीता दीदी को उनके जीवनकाल में जानने का सौभाग्य नहीं मिला, और मैंने कभी नहीं सोचा था कि किसी दिन मैं इस संस्थान में सेवा कर पाऊँगा, लेकिन 2015 में, श्री गुरदेव सिंह (गीता दीदी के पोते) और श्री राजेश पाटनी मुझसे मिले और संस्थान के 1995 में जल गए ऑडिटोरियम के पुनर्निर्माण और पूरे परिसर  के नवीनीकरण के लिए एक वास्तुकार के तौर पर मेरी मदद मांगी, जिससे मुझे बहुत खुशी हुई.  कुछ साल बाद उन्होंने मुझसे फिर पूछा और मुझे इसकी प्रबंध समिति में अध्यक्ष पद का दायित्व सम्भालने लेने के लिए मना लिया.  आज मुझे यह कहते हुए खुशी हो रही है कि मौजूदा टीम अच्छा काम कर रही है, खासकर सेक्रेटरी के तौर पर श्री गुरदेव सिंह संस्थान को कुशलता से समूर्ण समर्पण  के भाव के साथ इसके चौतरफा विकास को सुनिश्चित करने के लिए अपना सारा समय और संसाधन समर्पित कर रहे हैं. मैं यह भी कहूँगा कि कार्यकारिणी के प्रमुख सदस्यों के बेहतरीन सहयोग से हम इसे निरंतर, अनेक समस्याओं के बावजूद आगे बढ़ने के प्रयास कर पा रहे हैं.  2019-20 में हमने गीता दीदी का जन्म शताब्दी वर्ष मनाया, और आज, जब हम उन्हें हर दिन याद करते हैं, तो हमें अपने अन्दर नई ऊर्जा का संचार महसूस होता है और बेहतर से बेहतर करने की प्रेरणा भी मिलती है.  

उस महान महिला को हमारी सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि हम उन उद्देश्यों के लिए खुद को समर्पित करें जिनका उन्होंने समर्थन किया था, ताकि हम अपने छात्रों के माध्यम से उनके सपनों को पूरा कर सकें, और गीता बजाज बाल मंदिर संस्थान को देश के सर्वश्रेष्ठ शिक्षण संस्थानों की सूची में एक नई ऊंचाई पर ले जा सकें.

मैं यह नई बनी वेबसाइट गीता जी की याद और युवा बालक – बालिकाओं और महिला शिक्षिकाओं की एक ऐसी नई पीढ़ी को शिक्षित करने के उनके  स्वप्न को समर्पित करता हूँ, जो उनके आदर्शों को महत्व देंगे और एक महान भारत बनाने में मदद करेंगे.

​शुभकामनाओं सहित,

गुरदेव सिंह

संस्थान मंत्री

गीता बजाज बाल मंदिर संस्थान की वेबसाइट में आपका स्वागत है !

 

यह वेबसाइट फरवरी 2020 में हमारी  संस्थापिका, महान गांधीवादी और स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्रीमती गीता बजाज के जन्मशती समारोह के अवसर पर प्रारंभ की गई थी. हमारा  उद्देश्य  है कि हम इसके माध्यम से न केवल स्वर्गीय गीता बजाज और उनके जीवन के बारे में वर्तमान पीढ़ी को जानकारी उपलब्ध करा सकें, बल्कि इसके ज़रिये बजाज बाल मंदिर संस्थान की दिन प्रतिदिन की गतिविधियों और प्रगति की जानकारी भी देते रहें.

 

इस ऐतिहासिक संस्थान की स्थापना आज से 73 वर्ष पूर्व श्रीमती गीता बजाज द्वारा समाज के वंचित वर्ग के कुछ नन्हे मुन्नों को साथ लेकर की गई थी और आपने अपने जीवन काल में इसे एक प्रतिष्ठित, उच्च गुणवत्तायुक्त व बालक बालिकाओं के सर्वांगीण विकास हेतु शिक्षा के केंद्र के रूप में उच्च माध्यमिक विद्यालय व महिला शिक्षक प्रशिक्षण संस्थान के रूप में पुष्पित ,पल्लवित और वर्धित होते देख लिया था.  गीता बजाज ने जीवन भर संघर्ष किया, पहले अपने लिए उचित शिक्षा प्राप्त करने के लिए, और फिर बड़ी मेहनत से, ईंट-दर-ईंट इस महान संस्थान की स्थापना करने के लिए - जिसमें अब गीता बजाज बाल मंदिर वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय और गीता बजाज महिला शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय शामिल हैं - और जिसका नाम बदलकर अगस्त 1995 में उनके निर्वाण प्राप्त करने के बाद उनका अपना नाम जोड़ दिया गया.  यह उनकी स्मृति के लिए एक उपयुक्त श्रद्धांजलि है.

श्रीमती गीता बजाज ने गांधीजी की इच्छा अनुरूप गांधीवादी मूल्यों को अपने छात्र - छात्राओं से परिचित कराया. इस संस्था द्वारा प्रदान की जा रही शिक्षा में शैक्षिक उत्कृष्टता के साथ-साथ सामंजस्य पूर्ण सर्वांगीण व्यक्तित्व के विकास का ध्येय रखा गया है. यहां कराई जाने वाली पाठ्येतर गतिविधियां छात्रों की न केवल छिपी हुई प्रतिभा को बाहर लाती हैं वरन उनमें अपनी क्षमताओं पर भरोसा और आत्मविश्वास बढ़ाती है. यहां सिखाए गए कौशल विद्यार्थी को जीवन में आत्मनिर्भरता की ओर लक्षित है.

श्रीमती गीता बजाज ने ह्रदय से गांधीवादी होते हुए भी आधुनिक समय की आवश्यकताओं को कभी नज़रंदाज़ नहीं किया. उनमें नैतिकता और गांधीवादी मूल्यों की पकड़ को छोड़े बिना नए व पुराने के बीच संतुलन बनाए रखने की ख़ूबी थी, उसी के अनुरूप संस्थान में कंप्यूटर शिक्षा प्रारंभ की गई, साथ ही संस्थान अन्य उच्च सुविधाओं की उपलब्धता हेतु अग्रसर है. इसी कारण हमारा ध्येय प्रत्येक छात्र को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के साथ छात्रों का सर्वांगीण विकास करना है जिससे वे एक अच्छे मनुष्य, देश के एक सुयोग्य नागरिक बनने के साथ-साथ वक़्त की चुनौतियों का भी सामना कर सकें. हमारा प्रयास उन्हें सीखने का ऐसा वातावरण प्रदान करना है जिससे उनका शारीरिक, मानसिक, सामाजिक विकास के साथ-साथ उनमें अच्छे नागरिक गुणों का भी विकास हो सके.

इस कार्य में सफल होने के लिए संस्थान प्रबंधन को आपका सहयोग अपेक्षित रहेगा और यही हम सबकी पूज्य गीता दीदी को उनकी 104 वी जयंती पर सच्ची श्रद्धांजलि होगी

अंत में मैं आपको सहर्ष सूचित करता हूं कि हमने विद्यालय में जुलाई 2023 के शैक्षणिक सत्र से प्राथमिक शिक्षा अंग्रेजी माध्यम से देना शुरू कर दिया है, जिसे हम भविष्य में उत्तरोत्तर रूप से माध्यमिक व उच्च माध्यमिक कक्षाओं में भी लागू करेंगे.

  समस्त शुभकामनाओं सहित ....

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