Estd: 7th July 1952
स्थापना 7 जुलाई 1952
1919-1995
संस्थान कार्यकारिणी समिति एवं पदाधिकारी
श्री रवि कुमार गुप्ता
अध्यक्ष (सितंबर 2020 से)
श्री रवि कुमार गुप्ता सितंबर 2020 से हमारे अध्यक्ष हैं. इससे पहले भी वह 2016 से हमारे साथ सक्रिय रूप से जुड़े हुए थे और उन्होंने संस्थान के इतिहास में हमारी जर्जर होती पुरानी इमारतों के नवीनीकरण के काम में न सिर्फ एक सलाहकार का कार्य किया बल्कि के साथ ही एक नयी इमारत के निर्माण को पूरी तरह अपने हाथ में लिया , जब उन्होंने नए NTPC ब्लॉक और गीता गिरधर सभागार (ऑडिटोरियम) के डिज़ाइन और निर्माण कार्य की देखरेख की.
श्री गुप्ता देश के सबसे जाने माने वास्तुकारों में से एक हैं. 1974 में चंडीगढ़ कॉलेज ऑफ़ आर्किटेक्चर (पंजाब) से आर्किटेक्चर में ग्रेजुएशन करने के बाद, उन्होंने उसी वर्ष में जयपुर में अपनी स्वयं की फर्म शुरू की. आज वे राजस्थान के अंदर और बाहर कई औद्योगिक घरानों के मुख्य आर्किटेक्चरल कंसल्टेंट हैं, जिसमें अंबानी परिवार (रिलायंस मुकेश अंबानी ग्रुप), ओबेरॉय ग्रुप ऑफ़ होटल्स और कई अन्य प्रतिष्ठित व्यावसायिक घराने शामिल हैं.
अपने करियर की शुरुआत में आप राजस्थान स्मॉल इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन, राजस्थान टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन, राजस्थान विश्वविद्यालय आदि के आर्किटेक्चरल कंसल्टेंट रहे हैं, जिस दौरान उन्होंने दिल्ली में राजस्थली हैंडीक्राफ्ट्स एम्पोरियम, कई एग्जीबिशन पवेलियन और टूरिस्ट बंगले, इन्फॉर्मेशन सेंटर आदि डिज़ाइन किए और पर्यावरण विकास कार्यों में भी मदद की. आपने रामगढ़ में IX एशियाई खेलों (1982) के नौकायन इवेंट के लिए प्रतिष्ठित टूरिस्ट विलेज भी डिज़ाइन किया.
श्री गुप्ता विभिन्न धर्मार्थ संस्थाओं से भी जुड़े हुए हैं और उनके लिए डिज़ाइन का काम करते रहे हैं.
हमें गर्व है कि इतनी व्यस्तताओं होने के बावजूद, श्री रवि गुप्ता ने 5 वर्ष पहले हमारी संस्था का अध्यक्ष पद स्वीकार किया और वे अपने दायित्वों को हृदय से निभाते आ रहे हैं .

श्री गुरदेव सिंह सौंई
संस्थान मंत्री (अगस्त 2014 से)
गुरदेव सिंह, बाल मंदिर जिनकी रगों में बसा है, स्वर्गीय गीता बजाज के इकलौते दोहिते और स्वर्गीय जसदेव सिंह जी के सुपुत्र हैं, जिन्होंने लगभग 18 सालों तक बाल मंदिर में मंत्री के तौर पर सेवा की. गुरदेव सिंह मई 2010 में कार्यकारिणी समिति के सदस्य में शामिल हुए, और अगस्त 2014 में उन्हें संस्थान मंत्री चुन लिया गया. आप नई दिल्ली में रहते हैं, लेकिन अब संस्थान के की देखभाल के लिए हर माह लगभग एक सप्ताह जयपुर में बिताते हैं.
पेशे से इलेक्ट्रिकल और रेलवे इंजीनियर, गुरदेव सिंह जी भारतीय रेलवे और विभिन्न मेट्रो संगठनों में एक जाना-माना नाम हैं. पिछले 35 सालों में उन्होंने यह सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाई है कि देश में सभी नई मेनलाइन और मेट्रो ट्रेनों में सबसे आधुनिक तकनीक हो और इन ट्रेनों में ज़्यादातर उपकरण प्रतिष्ठित विदेशी कंपनियों से टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के तहत भारत में बनाए जाएं - आज देश के रेल नेटवर्क पर चलने वाला हर विद्युतीय इंजन आधुनिकतम टेक्नोलॉजी पर बना है जो वे 1990 के दशक में ABB (स्विट्ज़रलैंड एवं स्वीडन) से लाए थे, यह सुनिश्चित करते हुए कि कॉन्ट्रैक्ट पर दस्तखत होने के 5 साल के भीतर ये इंजन भारत में बनना शुरू हो जाये ! यह लोकोमोटिव आज देश भर में फैले विशाल रेलवे नेटवर्क की रीढ़ है, जिसने यात्री ट्रेनों के साथ साथ औद्योगिक विकास में भी निरंतर मदद की है.
रेडियो और टेलीविज़न प्रसारण और पत्रकारिता
अपने इंजीनियरिंग व्यवसाय के अलावा, श्री गुरदेव सिंह 1970 के दशक के आखिर से रेडियो और टेलीविज़न पर एक लोकप्रिय स्पोर्ट्स कमेंटेटर रहे हैं. हॉकी, क्रिकेट, बास्केटबॉल, बैडमिंटन, टेनिस, फुटबॉल, एथलेटिक्स के लिए भारत के देश के छोटी के रेडियो/टीवी कमेंटेटरों के साथ खेलों की जीवंत कमेंट्री के लिए अंतर्राष्ट्रीय पैनल में वे जयपुर से स्नातक डिग्री हासिल करने के 5-6 वर्षों में ही चुने लिए गए, और उन्होंने 1987 में विश्व कप क्रिकेट, 1981 में विश्व कप हॉकी, 1985 में ऑस्ट्रेलिया में चैंपियंस ट्रॉफी हॉकी, 1982 में दिल्ली में आयोजित एशियाई खेलों, 1981 में कोलकाता में हुई एशियाई बास्केटबॉल चैंपियनशिप, 1988 में भारतीय हॉकी टीम का पाकिस्तान दौरा, और भारत में क्रिकेट, हॉकी और बास्केटबॉल टूर्नामेंट की कई अन्य श्रृंखलाओं सहित बड़ी संख्या में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कार्यक्रमों को कवर किया है.
अपने लंबे प्रसारण जीवन में उन्होंने इस क्षेत्र के देश के प्रसारण जगत की सबसे जानी मानी हस्तियों के साथ माइक शेयर किया है, जिनमें (स्व.) राज सिंह डूंगरपुर, हर्षा भोगले, टाइगर पटौदी आदि शामिल हैं.
प्रिंट मीडिया में उनके हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लिखे हुए लेख राष्ट्रीय स्तर के कई अखबारों और पत्रिकाओं में छपे हैं.
हाल ही में, उन्होंने अपने स्वर्गीय पिता जसदेव सिंह जी की आत्मकथा “मैं जसदेव सिंह बोल रहा हूँ” का अंग्रेजी में संपादन और अनुवाद किया है. इस किताब ("ऑन द विंग्स ऑफ़ रेडियो वेव्स") का अप्रैल 2022 में एक शानदार समारोह में प्रख्यात क्रिकेट खिलाडी कपिल देव ने लोकार्पण किया था.

श्री राजेश पाटनी
कोषाध्यक्ष (मार्च 2015 से),
कार्यकारिणी समिति सदस्य (अक्टूबर 2013 से)
अपने स्वर्गीय पिता श्री कोमल चंद जी पाटनी (जिन्होंने लगभग 16 वर्षों तक बाल मंदिर के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया) की विरासत को संभालते हुए, संस्थान की कार्यकारी समिति में उपाध्यक्ष के रूप में शामिल हुए और 2015 से इसके कोषाध्यक्ष हैं. संस्थान के संचालन के दिन प्रतिदिन के सभी प्रकार के कार्यों को संस्थान मंत्री गुरदेव सिंह जी के साथ आप ने बड़ा दायित्व अपने अनुभवी कन्धों पर ले रखा है.
जयपुर में जन्मे , प्रतिष्ठित ज़ेवियर्स स्कूल में पढ़े और राजस्थान विश्वविद्यालय से कॉमर्स ग्रेजुएट, राजेश पाटनी जी रियल एस्टेट से और प्राकृतिक संगमरमर तथा ग्रेनाइट के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं. बाल मंदिर के अलावा, वे कई सामाजिक संगठनों से सक्रिय रूप से जुड़े हुए हैं. वे एक खेल प्रेमी हैं और उन्हें रोज़ाना टहलना पसंद है, जो उनके लिए एक धर्म जैसा है.

श्री प्रशांत शर्मा
उपाध्यक्ष (अगस्त 2025 से),कार्यकारिणी समिति सदस्य (2023 से)
श्री प्रशांत शर्मा इंस्टीट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया से फेलो चार्टर्ड अकाउंटेंट हैं. आप 1999 से वी.पी. शर्मा एंड एसोसिएट्स चार्टर्ड अकाउंटेंट्स के संस्थापक पार्टनर के रूप में चार्टर्ड अकाउंटेंट के तौर पर प्रैक्टिस कर रहे हैं. संस्थान कार्यकारिणी समिति के सब से युवा सदस्य प्रशांत जी 2017 से इंसॉल्वेंसी एंड बैंकरप्सी बोर्ड ऑफ इंडिया के साथ रजिस्टर्ड इंसॉल्वेंसी प्रोफेशनल भी हैं. आपने अपनी स्कूली शिक्षा सेंट जेवियर्स स्कूल जयपुर से, स्नातक की डिग्री कॉमर्स कॉलेज, जयपुर से और CA आर्टिकल ट्रेनिंग कालानी एंड कंपनी , जयपुर से की है.
शर्मा जी ICAI के CIRC के मानसरोवर CPE स्टडी सर्कल के संस्थापक संयोजक भी हैं और आपने विभिन्न विषयों पर कई सेमिनारों को संबोधित किया है. उनके व्यवसायिक विशेषज्ञता के क्षेत्रों में मैनेजमेंट कंसल्टेंसी, प्रोजेक्ट कंसल्टेंसी, ऑडिटिंग, टैक्स प्लानिंग, इंसॉल्वेंसी और विभिन्न अथॉरिटी और ट्रिब्यूनल्स के सामने प्रतिनिधित्व शामिल है.
प्रशांत जी संस्थान की गतिविधियों में गहरी रूचि लेते हैं

श्रीमती प्रीति खन्ना
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2018 से)
हमारे पूर्व मंत्री स्वर्गीय जसदेव सिंह की सुपुत्री और स्वर्गीय गीता बजाज की दोहिति, प्रीति जी (जिन्हें संस्थान परिवार में सभी लोग टीना जी के नाम से जानते हैं), को भी बचपन से ही बाल मंदिर से प्यार अपनी विरासत में मिला है. उन्होंने गीता दीदी के साथ बहुत समय बिताया है और पटना / इलाहाबाद के खन्ना परिवार में विवाह से पहले कुछ वर्षों तक बाल मंदिर में अध्यापिका के रूप में भी काम किया है. आप दिल्ली विश्वविद्यालय से होम साइंस स्नातक हैं और अपने स्कूल तथा नई दिल्ली के यूनिवर्सिटी होम साइंस कॉलेज में हमेशा क्लास में अव्वल दर्जे से उत्तीर्ण रहती थीं.
प्रीति खन्ना 2018 में संस्थान की कार्यकारी समिति में शामिल हुईं और इसकी गतिविधियों में सदैव गहरी दिलचस्पी लेती हैं, खासकर जब कला और संस्कृति की बात आती है.

सुश्री कमल पानगड़िया
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2020 से)
कमल पानगड़िया, जिन्हें बाल मंदिर में सभी लोग 'कमल दीदी' के नाम से जानते हैं, ने अपना पूरा जीवन एक शिक्षिका के रूप में बिताया है - एक प्रकार से उन्होंने अपना समस्त समय शिक्षा के क्षेत्र को समर्पित कर दिया है. अपने स्वर्गीय पिता श्री बालू लाल जी पानगड़िया - जो श्रीमती गीता बजाज के करीबी सहयोगी थे - की ही तरह वे भी लगभग अपने बचपन से ही बाल मंदिर से जुड़ी हुई हैं.
कमल दीदी ने जयपुर के मालवीय नगर में सरकारी हायर सेकेंडरी स्कूल और बाद में ......स्कूल में प्रिंसिपल के रूप में कार्य किया. एक समर्पित टीचर और जानी-मानी समाज सेविका के रूप में अपनी सेवाओं के लिए उन्हें कई सम्मान मिले हैं, जिनमें प्रतिष्ठित राष्ट्रपति पुरस्कार और ...... भी शामिल हैं.
यद्यपि आप आधिकारिक तौर पर 2020 में कार्यकारिणी समिति के सदस्य के तौर पर हमसे जुड़ीं, लेकिन बाल मंदिर में कई समाज सेवी संस्थाओं के ज़रिए कई गतिविधियों का आयोजन करने और ऐसे परिवारों के बच्चों के लिए आर्थिक और अन्य प्रकार से की सहायता दिलाने के लिए लंबे समय से जानी जाती हैं, जो अपनी फीस नहीं दे सकते या स्कूल यूनिफॉर्म, कॉपी- किताबें नहीं खरीद सकते. वे हर साल सर्दियों में उन बच्चों के लिए ऊनी स्वेटर आदि का भी इंतज़ाम करती हैं जिनके माता-पिता गर्म कपडे नहीं खरीद पाते.
कमल पानगड़िया लगभग हमारी सभी बैठकों और कैंपस में होने वाले अन्य कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल होती हैं.

श्रीमती सोनल सुराणा
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2020 से)
श्रीमती सोनल सुराणा एक गृहिणी और बिज़नेस-वुमन हैं, जो समाज सेवा में लगे अनेक NGO एवं अन्य संस्थाओं और में जाने-माने सुराणा परिवार का प्रतिनिधित्व करती हैं. उनका बाल मंदिर से पुराना रिश्ता है - उनके ससुर स्वर्गीय श्री प्रकाश चंद सुराणा कई सालों तक हमारी कार्यकारिणी समिति में कोषाध्यक्ष थे और संस्थान के साथ उनका लंबा जुड़ाव था.
सोनल जी का शानदार ज्वेलरी डिजाइनिंग कौशल, परंपरा और आधुनिकता को एक साथ जोड़ती हैं. दूर-दूर तक यात्रा करने के कारण उनके व्यक्तित्व में दुनियादारी की समझ और सहानुभूति आई है. वे हमारे कार्यक्रमों में नियमित रूप से शामिल होती हैं और हमारी गतिविधियों में हिस्सा लेती हैं.
श्रीमती नीलिमा जैन
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2020 से)
श्रीमती नीलिमा जैन एक बिज़नेस परिवार से हैं: उनके स्वर्गीय श्वसुर श्री धर्म सिंह जी बाल मंदिर के पड़ोस में रहते थे और स्वर्गीय गीता बजाज से उनके अत्यंत आत्मीयता के सम्बन्ध थे. उन्होंने गीता जी के साथ मिलकर बाल मंदिर के इलाके में शांति और सद्भाव के लिए लड़ाई लड़ी, जब राज्य सरकार - 1960 के दशक के आखिर में - संस्थान के पास की ज़मीन का टुकड़ा सिनेमा हॉल बनाने के लिए आवंटित कर रही थी. उन्होंने देश के सुप्रीम कोर्ट तक यह लड़ाई लड़ी और अंततः कोर्ट ने इस आदेश को निरस्त कर दिया.
नीलिमा जी व्यक्तिगत रूप से 2020 से हमारी गतिविधियों से जुड़ी हुई हैं – आप नियमित रूप से हमारे अधिकांश कार्यक्रमों और बैठकों में भाग लेती हैं और जब भी हम उनसे सलाह लेते हैं तो अपने बहुमूल्य सुझाव भी देती हैं.

श्रीमती कुलजीत सौंई
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2023 से)
श्रीमती सौंई स्वर्गीय गीता बजाज की पोती-बहू हैं और परिवार में गुरदेव सिंह जी से विवाह के बाद आपने गीता जी के साथ 12 वर्ष से ज़्यादा समय बिताया; इस तरह उन्होंने समाज सेवा के प्रति पूरे परिवार के भक्तिपूर्ण रवैये और देश वासियों और आने वाली पीढ़ियों पर इसके प्रभाव को देखा और समझा. नई दिल्ली में जन्मी, कुलजीत जी ने इस प्रतिष्ठित परिवार में विवाह से पहले दिल्ली विश्वविद्यालय से अपनी स्कूली शिक्षा और ग्रेजुएशन पूरा किया.
कुलजीत जी पिछले 4 दशक से अधिक समय से बाल मंदिर को क़रीब से देखती रही हैं, हालांकि वे औपचारिक रूप से केवल दो साल पहले ही इसकी मैनेजमेंट में शामिल हुई. वे स्कूल एवं बी. एड. कॉलेज की विभिन्न सांस्कृतिक गतिविधियों और खासकर प्राइमरी कक्षाओं में सक्रिय रूप से रुचि लेती हैं. इसके आतिरिक्त वे हमारे सभी अन्य कार्यक्रमों और कार्यकारिणी समिति की बैठकों में नियमित रूप से शामिल होती हैं.

श्री रवि खंडेलवाल
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2023 से)
व्यवसायी और उद्योगपति रवि खंडेलवाल की उम्र 61 साल है , आप ने B.Sc. की डिग्री हासिल करने के बाद MBA भी किया है. यद्यपि आप 2023 में ही संस्थान कार्यकारिणी समिति में शामिल हुए हैं किन्तु अपने बचपन से ही आप बाल मंदिर से जुड़े हुए रहे हैं. अपने पिता, स्वर्गीय सीता राम जी खंडेलवाल के साथ आप अनेकों बार संस्थान परिसर में आते जाते थे. स्व. सीताराम जी जो साठ के दशक से ही बाल मंदिर परिवार का एक अहम हिस्सा थे, व्यवसायिक व्यस्तता के बावजूद आवश्यकता पड़ने पर हमेशा गीता दीदी और बाल मंदिर की मदद के लिए मौजूद रहते थे.
रवि खंडेलवाल जी भी और हमारी सब गतिविधियों में अग्रणी रह कर भाग लेने वाले सदस्यों में से एक हैं.
वे राजस्थान चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री से भी एडिशनल सेक्रेटरी के तौर पर जुड़े हुए हैं और उन्होंने KVGIT कॉलेज (वैशाली नगर) में तीन वर्ष तक सेक्रेटरी का पद भी संभाला है.

श्री राम प्रकाश चौधरी
कार्यकारिणी समिति सदस्य (2023 से)
लगभग 76 साल के राम प्रकाश जी ने B.Sc. और BMS किया और 1971 में आकाशवाणी, जयपुर में इंजीनियरिंग असिस्टेंट के तौर पर नौकरी शुरू की. आकाशवाणी में लगभग 20 साल काम करने के बाद, उन्होंने नौकरी छोड़ दी और साउंड और इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के क्षेत्र में अपना काम शुरू किया, जिसमें वे विशेष योग्यता रखते थे.
बाल मंदिर के साथ उनका जुड़ाव 50 के दशक में ही शुरू हो गया था, जब उनके पिता स्वर्गीय डॉ. गजाधर प्रसाद चौधरी गीता जी से जुड़े, जिन्हें राम प्रकाश जी मौसी जी कहते थे.
राम प्रकाश जी का शिक्षा के क्षेत्र से लंबा जुड़ाव रहा है, वे 2006 से जयपुर में अग्रवाल शिक्षा समिति के सदस्य हैं, छह साल तक वे अग्रवाल सीनियर सेकेंडरी स्कूल के सेक्रेटरी रहे और बाद में इसके BEd कॉलेज के सेक्रेटरी भी रहे
वे लंबे समय से अनौपचारिक रूप से बाल मंदिर से जुड़े रहे हैं, खासकर 1995 के बाद से स्वर्गीय जसदेव सिंह से दोस्ती के कारण, जो आकाशवाणी के एक वरिष्ठ अधिकारी भी थे.
राम प्रकाश जी हमारी सभी गतिविधियों और कार्यक्रमों में गहरी दिलचस्पी लेते हैं.


