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विद्यालय में 4 से 15 नवम्बर 2026 के दौरान दीपावली अवकाश रहेगा

1952 में अपनी शुरुआत के समय से ही बाल मंदिर समाज के पिछड़े और वंचित वर्ग के लिए उम्मीद की एक किरण का काम कर रहा है. जयपुर में ज़रूरतमंद बच्चों को पढ़ाने के लिए गीता बजाज की एक छोटी सी पहल के रूप में शुरू हुआ नन्हा सा बाल मंदिर आज राज्य का एक अत्यंत सम्मानित शिक्षण संस्थान बन चुका है. विगत साढ़े सात दशक से यह संस्थान स्वतंत्रता सेनानी गीता बजाज की विरासत को निरंतर आगे बढ़ा रहा है और बालक-बालिकाओं तथा शिक्षक बनने की इच्छुक युवतियों को उच्च कोटि की शिक्षा और सशक्तिकरण प्रदान कर रहा है.

एक शानदार और प्रेरणादायक सफ़र....!

फोटो गैलरी

संस्थान पत्रिका

हमारे प्रेरणा स्त्रोत – हमारे रहनुमा 

हमारे सफ़र के कुछ यादगार पड़ाव ...

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गाँधी जयंती 

​​शिविर

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गीता बजाज 

​​​ट्रॉफी

हमारा इतिहास....

​वर्ष 1952 की 7 जुलाई, गुरु पूर्णिमा का पुनीत पावन दिन था,जब श्रीमती गीता बजाज ने अपनी बहन के जयपुर के मोती डूंगरी इलाक़े के नायब जी का बाग स्थित मकान, जिसके एक छोटे से किराये के कमरे में वे अपनी नन्ही सी पुत्री के साथ रहती थीं ,की छत के नीचे  समाज के दीन-हीन तबके के बच्चों को शिक्षा प्रदान करने के पवित्र कार्य का शुभारंभ किया. इस महान कार्य के लिए उन्होंने सबसे पहले जयपुर के मोती डूंगरी क्षेत्र में रहने वाले दिहाड़ी मज़दूरों के 4-5 नन्हे मुन्ने बच्चे चुने ,उन्हें नहलाया धुलाया और फिर क-ख-ग और 1- 2- 3 पढ़ाना शुरू किया. वस्तुतः यह एक नितांत साधन हीन शुरुआत थी। गीता जी के पास उनकी दृढ़ शिक्षा इच्छाशक्ति और कुछ कर गुज़रने के जुनून के अलावा कुछ भी तो नहीं था. जब इस अकेली महिला ने बाधाओं और परिणामों की परवाह किए बिना, स्वतंत्र भारत में एक समर्पित सामाजिक जीवन की लंबी एवं दुष्कर यात्रा की शुरुआत की, उस समय वे रवींद्रनाथ टैगोर के उस संदेश का यथावत एवं अक्षरशः अनुसरण करने की कोशिश कर रही थीं , जो टैगोर ने अपने प्रेरक गीत “एकला चलो रे” में दिया था.

गांधी जी द्वारा गीता दीदी को उनके पति गिरधारी लाल जी बजाज की असामयिक मृत्यु पर लिखे गए संवेदना पत्र से उन्हें जीने की हिम्मत  मिली और इन्हीं शब्दों से प्रेरित हो कर उन्होंने बच्चों और महिलाओं की शिक्षा को अपने जीवन का ध्येय बना लिया...

नये समाचार ...

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026

गांधी जयंती शिविर – गांधीवादी विचार, रचनात्मकता और ज्ञान अर्जन का उत्सव

बजाज संस्थान ने 29 सितंबर 2026 से 2 अक्टूबर 2026 तक चार दिवसीय गांधी शिविर का आयोजन किया, जिसमें छात्रों, शिक्षकों और अतिथियों को गांधीवादी विचार, रचनात्मकता, संस्कृति, कला, विज्ञान और खेल के समृद्ध उत्सव में एक साथ लाया गया.

शिवर में विविध गतिविधियाँ शामिल थीं. प्रत्येक दिन की शुरुआत एक प्रख्यात वक्ता के ज्ञानवर्धक सत्र से हुई, जिसके बाद दोपहर में विद्यालय के भीतर और अंतर-विद्यालयीय गतिविधियाँ, प्रतियोगिताएँ और खेल आयोजन हुए.

इस वर्ष, शिविर में श्री गजेंद्र सिंह फोगाट, सुश्री विद्या जैन, श्री सवाई जी और डॉ. बी. एम. शर्मा उपस्थित थे. अपने विचारोत्तेजक संवादों के माध्यम से उन्होंने वर्तमान परिदृश्य में गांधीवादी सिद्धांतों की प्रासंगिकता पर विस्तार से चर्चा की. उनके सत्रों को छात्रों और शिक्षकों दोनों ने खूब सराहा और आनंद लिया.

बी.एड. कॉलेज और स्कूल के छात्रों द्वारा पहले से ही सुनियोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने शिविर में जीवंतता और गहराई का संचार किया. कार्यक्रमों में टीम वर्क की झलक दिखी और सभी ने इसकी सराहना की.

विभिन्न प्रतियोगिताओं और खेल गतिविधियों ने छात्रों को भाग लेने, खुद को चुनौती देने और प्रतिस्पर्धा की सच्ची भावना सीखने के लिए एक स्वस्थ मंच प्रदान किया.

शिविर का एक प्रमुख आकर्षण कला और विज्ञान प्रदर्शनी थी, जो बेहद सफल रही. खास बात यह है कि प्रदर्शनी के लिए छात्रों से कोई धनराशि नहीं ली गई. इस वर्ष, प्रदर्शनी को दो अलग-अलग भागों - विज्ञान और कला - में आयोजित किया गया था. प्रदर्शनी का विचार शिक्षकों के साथ लगभग एक महीने पहले साझा किया गया था, जिससे छात्रों और शिक्षकों को पर्याप्त समय मिल गया. "कचरे से सर्वश्रेष्ठ" विषय ने विशेष रूप से दर्शकों को आकर्षित किया. प्रदर्शनी में दिखाई गई सामग्री में रचनात्मकता, कल्पनाशीलता और अपशिष्ट पदार्थों के विचारशील उपयोग से अतिथि प्रभावित हुए और उन्होंने छात्रों और शिक्षकों के प्रयासों की दिल से सराहना की.

शनिवार, 5 सितंबर 2026

गीता गिरधर सभागार में शिक्षक दिवस का कार्यक्रम

गीता बजाज संस्थान में 5 सितंबर को गीता गिरधर सभागार में शिक्षक दिवस बड़े धूमधाम से मनाया गया .कार्यक्रम का प्रारंभ मां सरस्वती और भारत के पूर्व राष्ट्रपति, महान दार्शनिक और शिक्षाविद डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ . विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने शिक्षक दिवस मनाये जाने के कारण और उसके महत्व पर प्रकाश डाला.

सौभाग्यवश इस अवसर पर गीता बजाज की सुपुत्री श्रीमती कृष्णा जसदेव सिंह भी कार्यक्रम में उपस्थित थी. उन्होंने अपने आशीर्वचन में सभी शिक्षकों को ईमानदारी, निष्ठा, समर्पण और लगन के साथ अपने शिक्षण कार्य को करने के लिए प्रेरित किया . छात्राध्यापिकाओं एवं विद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा सभी शिक्षकों का सम्मान किया गया. संस्थान मंत्री श्री गुरदेव सिंह द्वारा आज के समय में शिक्षकों की चुनौती पूर्ण भूमिका के बारे में बताया गया साथ ही बच्चों में सामाजिक व नैतिक मूल्यों का विकास करने पर बल दिया .

बी.एड प्राचार्या ने इस अवसर पर सभी शिक्षको की तरफ से संस्थान की परंपराओं, गांधीवादी मूल्यों व अनुशासन की भावना का छात्रों में विकास करते हुए इस संस्थान को उन्नति के पथ पर आगे ले जाने की बात कही.

कार्यक्रम के अंत में संस्थान अध्यक्ष की तरफ से सभी शिक्षकों के सम्मान में लंच की व्यवस्था की गई थी.

शनिवार, 5 सितंबर 2026

बाल मंदिर संस्थान में जन्माष्टमी पर्व

संस्थान में जन्माष्टमी पर्व उमंग व उल्लास के साथ मनाया गया. इस अवसर पर विद्यालय के नन्हे मुन्ने बच्चों ने कृष्ण के मोहक भजन "श्रीमन राधे गोविंदा” “मन भज ले हरि का प्यारा नाम है" व "मनिहारी का भेष बनाया ,श्याम चूड़ी बेचने आया" प्रस्तुत किया वहीं बीएड छात्राध्यापिकाओं ने “नटवर नागर नंदा”, “भजो रे मन गोविंदा” व “राधे -राधे, राधे -राधे ,राधे गोविंदा, वृंदावन चंदा, अनाथ नाथ दीनबंधु राधे गोविंदा” आदि भजन गाकर श्री कृष्ण की आराधना की. नन्हे मुन्ने बच्चों ने कृष्ण, सुदामा ,बलराम, राधा , कालिया नाग आदि का रूप धारण करके मोहक झांकी प्रस्तुत की. कृष्ण जन्म के साथ विद्यालय के बच्चों ने कृष्ण जन्म बधाई "आज तो बधाई बाजे नंद जी के द्वार पर" सभी के समक्ष नृत्य के साथ प्रस्तुत की एवं महाविद्यालय की छात्राओं द्वारा कृष्ण स्तुति"हे कृष्णा करुणा सिंधु , दीनबंधु जगत्पते , गोपेश ,गोपिका कांत, श्री राधा कांतम नमस्तुते "के साथ-साथ महारास"मेरे कान्हा ने बंसी बजाई, की मनमोहक प्रस्तुति की गयी.

कार्यक्रम की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि संस्थान संस्थापिका की सुपुत्री श्रीमती कृष्णा जसदेव सिंह जन्माष्टमी के दिन ही अपने 90 वर्ष की आयु पूर्ण करके 91 वे वर्ष में प्रविष्ट हुई थीं अतः इस अवसर पर उनका जन्मदिन भी संस्थान परिवार की तरफ से धूमधाम से मनाया गया. विद्यालय के शिक्षकों और महाविद्यालय की व्याख्याताओं ने दीदी को जन्मदिन की बहुत-बहुत बधाई दी और उनसे आशीर्वाद लिया.

कार्यक्रम का समापन भगवान श्री कृष्ण की आरती के साथ हुआ.

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