Estd: 7th July 1952
स्थापना 7 जुलाई 1952
1919-1995
हमारी संस्थापिका - गीता बजाज - हमारी "बड़ी दीदी"

समय की रेत पर अमिट पद चिन्ह
यूं तो लाखों लोग रोज जग में पैदा होते हैं -
और न जाने कितने जग से रोज विदा होते हैं ।।
पर उनमें से कुछ दुनिया में काम ऐसे कर जाते …
जन गण मन में बस जाते हैं , नाम अमर कर जाते ।।
समय -शिला पर अमिट नाम उनका अंकित हो जाता -
आने वाला समय उन्हें श्रद्धा से शीश झुकाता ।।
वो हैं ऐसे पुष्प कि जो झरने को झर जाते हैं -
पर समाज को वे अपनी खुशबू से भर जाते हैं ।।
ऐसे ही कुछ लोगों में थी अपनी प्यारी दीदी -
जग में रहती थी लेकिन थीं जग से न्यारी दीदी ।।
कहने को अबला थीं पर सबलों पर भारी थीं व…
महामानवी थीं या फिर कोई अवतारी थीं वो ।।
जो भी थीं ,पर सच्चे अर्थों में महतारी थीं वो -
आदर की ,श्रद्धा की ,पूजा की अधिकारी थीं वो ।।
गई देशहित जेल, यातना सही, ना हिम्मत हारी -
जेल यंत्रणा से लेकर आई-क्षय की बीमारी ।।
अपनी चिंता नहीं ,उन्हें बस थी समाज की चिंता ..
आने वाले कल की चिंता और आज की चिंता ।।
सड़सठ वर्ष पूर्व इस दिन विद्यालय शुरू किया था;
और फिर इसमें अपना सारा जीवन होम किया था ।।
सत्य ,स्वावलंबन, सेवा, सादगी, स्वदेशी चिंतन -
इन जीवन मूल्यों को था दीदी का जीवन अर्पण ।।
आज नहीं दीदी शरीर से यद्यपि साथ हमारे,
पर करती मजबूत पुण्य स्मृति उनकी हाथ हमारे ।।
करें प्रतिज्ञा दीदी का सपना साकार करेंगे -
खून पसीने से उनके खाके में रंग भरेंगे ।।
प्रेम कुमार शर्मा











