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गीता दीदी की पुण्य तिथि

हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी संस्थान  में 3 अगस्त को पूज्य गीता दीदी की पुण्य तिथि अत्यंत श्रद्धा और भक्तिभाव  से मनाई गई. इस अवसर पर एक अंतर-विद्यालय भजन गायन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के अनेक विद्यालयों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया.  विद्यार्थियों द्वारा ईश्वरीय प्रेम और मूल्यों को समर्पित मधुर भजनों की प्रस्तुति से वातावरण आध्यात्मिकता और भक्ति से भर गया. इस अवसर पर निर्णायक के रूप में प्रसिद्ध गायक पंडित आलोक भट्ट (जो बाल मंदिर के पूर्व छात्र भी हैं !) एवं श्री रमेश मेवाल उपस्थित थे.


सर्वाधिक सौभाग्य की बात यह रही कि बाल मंदिर प्राथमिक विद्यालय में 1954 में शिक्षा हासिल कर चुके वरिष्ठ आयु के पूर्व छात्र श्री जयसिंह सैनी ने “बड़ी दीदी” श्रीमती गीता बजाज के साथ गुज़ारे अपने विद्यार्थी जीवन के संस्मरण अत्यंत भावुकतापूर्ण शब्दों में सुनाये. उन्होंने बताया कि किस तरह दीदी ने अपने अकेले के दम पर संसाधनों का अभाव होने के बावजूद समाज के वंचित वर्ग के बच्चों को इकट्ठा करके, उनमें शिक्षा की अलख जगाने के लिए इस संस्थान की नींव रखी थी, और उन्हें बाल मंदिर के लिए आवश्यक सुविधाएँ जुटाने के लिए किस प्रकार संघर्ष करना पड़ता था. उन्होंने विशेष रूप से याद किया जब दीदी कुछ गिने चुने छात्र – छात्राओं और शिक्षकों को ले कर देश के प्रथम प्रधान मंत्री  पंडित जवाहर लाल नेहरु - “चाचा नेहरु”- से मिलाने दिल्ली ले गयीं थीं...


सभी विजेताओं और प्रतिभागियों को प्रोत्साहन और सम्मान स्वरूप पुरस्कार एवं सर्टिफिकेट प्रदान किए गए. 

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